Navratro Ka Mehatva Aur Pooja Vidhi

navdurga

नवरात्रे कब है?

इस साल नवरात्रे 17 अक्टूबर से शुरू होंगे तथा 25 अक्टूबर दशहरा मनाया जाएगा!

navratro ka mehatva aur pooja vidhi :नवरात्रो का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व होता है! वेसे तो नवरात्रे साल में चार बार मनाए जाते थे लेकिन ये काम ही लोग जानते है! की यह कब-कब मनाए जाते है! चैत्र के नवराते, साल के पहले नवराते होते है, चौथे माह आसाढ़ में दूसरे नवराते आते है, आश्विन माह में शारदीय नवराते आते है, व् साल के अंत में, माघ माह में गुप्त नवराते होते है!

इन सभी नवरात्रों का जिक्र देवी भागवत व अन्य सभी धार्मिक ग्रंथोर में किया गया है! हिन्दू कलेंडर के हिसाब से चैत्र मास से पहले नवरात्रों को ही हिन्दू नव-वर्ष की शुरुआत होती है!

नवरात्रों का क्या महत्व है?

navratri ka kya mehatva hai?

नवरात्रे ऋतू परिवर्तन का भी संकेत देते है! अब हिन्दू केवल 2 ही नवरात्रे मनाते है! मार्च और अप्रैल के जैसे ही, सितम्बर और अक्टूबर के बीच भी दिन और रात की लम्बाई एक समान होती है! तो इस भौगोलिक समानता के हिसाब से नवरात्रे साल में 2 बार मनाए जाते है! इस प्रकार नवरात्रों में व्रत करने से हमारा शारीरिक और मानसिक संतुलन भी बना रहता है!

प्राचीन समय में नवरात्रे केवल चैत्र मास में मनाए जाते थे! परन्तु रावण से युद्ध करने से पहले राम जी देवी माँ का आशीर्वाद लेंना चाहते थे! और उनके पास इतना समय नही था की वे चैत्र मास तक प्रतीक्षा करते क्योंकि माता सीता रावण की कैद में थी! इसलिए राम जी ने आश्विन मास में 9 दिन तक देवी माँ का पूजन किया ताकि वे रावण से युद्ध में विजयी हो, और सीता माता को अपने साथ वापस अयोध्या लेजा सके! और यही कारण है की आश्विन मास के नवरात्रों में 9 दिन देवी माँ का पूजन करने के बाद दसवें दिन रावण दहन किआ जाता है! तबसे नवरात्रे साल में 2 बार मनाए जाते है!

नवरात्रों की शुरुआत कैसे हुई?

navratri ki shuruaat kaise hue?

दूसरी और नौ स्वरूपों वाली दुर्गा माँ ने (अम्बे माँ) ने महिषासुर से 9 दिन 8 रात लगातार युद्ध किया! महिषासुर ने अपनी कठोर तपस्या से देवताओं से अजय होने का वरदान ले लिए था! उसके बाद उसने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया! उससे सभी देवता परेशान हो गए और उन्होंने महिषासुर का अंत करने के लिए दुर्गा माँ की रचना की!

दुर्गा माँ और महिषासुर के बीच निरंतर 9 दिन तक युद्ध चलता रहा, दसवें दिन दुर्गा माँ ने महिषासुर का वध करके सभी को उसके प्रकोप से छुटकारा दिलाया!

(devi ke 9 swaroop)इसलिए नवरात्रों में हर दिन देवी के अलग स्वरुप को पूजा जाता है! यही कारण है की नवरात्रों में 9 कन्या जमाई जाती है! उनको घर लेकर खाना-पानी दिया जाता है, आदर सत्कार किया जाता है व् उन्हें दक्षणा देकर घर से विदा कर दिए जाता है! ऐसा मानना है की इससे देवी माँ प्रसन्न होती है और आपकी मनोकामना पूर्ण करती है!

 

नवरात्रों की पूजा के लिए क्या-क्या ख़रीदे ?

navratri ki taiyari kaise kare aur Pooja Vidhi?

नवरात्रों की पूजा विधि व् मनाने का तरीका सब जगह अलग-अलग है! व् लोग इसके लिए बहुत सी तैयारियां करते है! बाज़ार भरे रहते है इसके लिए खासतौर पे जो समान लिया जाता है वो कुछ इस प्रकार है:

  • रोली -पूजा करते समय रोली का तिलक माता को लगाए व् खुद को भी लगाए, कंजक जमाते समय कन्याओं को भी तिलक लगाया जाता है!
  • कलावा -ये नारियल पे बांधा जाता है, माता को दान किया जाता है, घर के सभी सदस्यों को कलाई में बांधा जाता है, कंजक को भी कलावा बांधा जाता है!
  • धूना -घर में शुद्धि के लिए जलाया जाता है, इसे आप हवन करते समय हवन में डाले!
  • कपूर -ये भी हवन में डाला जाता है
  • पंच मेवा भी माता को माता को चढ़ाई जाती है
  • घी, कलिवाली लॉन्ग, हवन सामग्री, दिया व् बति, साबूत चावल, धुप, माचिस, माता का चोला, गंगा जल, फूल माला, चुन्नी, नारियल, लकड़ी की चौकी, लाल कपड़ा, मिटटी का बर्तन, धान, रेत !
  • ये सब सामग्री चाहिए नवरात्रों में माता की पूजा क लिए, साथ ही लोग नवरात्रों में 9 दिन व्रत करते है, कुछ लोग पहले व् आखरी व्रत करते है
  • ऐसा मन जाता है की व्रत करने व् सच्चे मन से अम्बे माँ की पूजा करने से सब दुःख दर्द दूर हो जाते है और अम्बे माँ आपकी हर मनोकामना पूर्ण करती है!
  • नवरात्रे में हर दिन का अपना अलग महत्त्व होता है, हर दिन देवी के अलग स्वरुप को पूजा जाता है, नवरात्रों की अपनी महानता है नौ दिन और देवी के नौ स्वरुप!
  • हर दिन एक अलग स्वरुप को पूजा जाता है!

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