माँ….  बस यही एक नाम याद आता है

माँ….
बस यही एक नाम याद आता है,
मुझे हर मुसीबत में,
कितना सुकून मिलता है,
जब आराम करता हूँ तेरी गोद में ।
सही क्या है, गलत क्या है ?
ये तूने ही तो बताया है,
तू ही तो है माँ….
जिसने मुझे मुश्किलों से लड़ना सिखाया है ।
मेरे हर दुख तक़लीफ को
तूने अपने ऊपर लिया है,
जब जब हुआ निराश मैं, तूने अपने प्यार से
मेरा आत्मविश्वास मज़बूत किया है ।
तू ही है दुनिया मेरी, तुझसे ही मेरी पहचान है,
नहीं मानता मैं उस मिट्टी की मूरत को,
मेरे लिए तो साक्षात तू ही भगवान है ।
हो गया हूँ जवाँ फिर भी टोका टाकी करती है,
मेरी माँ मुझे आज भी छोटा बच्चा समझा करती है ।
थोड़ा सा भी परेशान हो जाऊं मैं,
तो परेशान हो जाती है वो,
हैरान हो जाता हूँ देखकर
कितनी खूबसूरती से हर रिश्ता निभाती है वो ।
किन लफ्ज़ों में शुक्रिया अदा करूँ तेरा ?
कहीं भी चला जाऊं, कितना भी काबिल बन जाऊं,
नहीं चुका सकता मैं, माँ कर्ज़ तेरा ।

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