खतरनाक लड़ाकू विमानों में ये नई टेक्नोलॉजी लगा रहा रूस, दुश्मनों से निपटना होगा आसान

रूस ने मिकोयान-गुरेविच MiG-29M / M2 और MiG-35 जैसे खतरनाक लड़ाकू विमानों में जल्द ही एक नया ऑटोमेटेड इंटेलिजेंट जी-लिमिट कंट्रोल सिस्टम लगाने की तैयारी की है. जो उच्च जी-लिमिट वाले युद्ध अभियानों के दौरान पायलेट की मदद करेगा. MiG कॉरपोरेशन के अनुसार, मिग -29 एम / एम 2 और मिग -35 लड़ाकू विमानों के विकास और उत्पादन में शामिल होने वाले इंजीनियरों को इंटेलिजेंट सिस्टम का पेटेंट दे दिया गया है जो 9 तक के उच्च जी-स्तर के दौरान पायलटों की मदद करेगा. इससे दुश्मनों के खतरे से निपटने में आसानी होगी और हवाई मुकाबले पर पायलट फोकस कर सकेंगे.

मिग -29 एम / एम 2 और मिग -35 विमानों में इंटेलिजेंट जी-लिमिट कंट्रोल लगने के बाद पायलट सुरक्षा के साथ समझौता किए बिना अपने फाइटर्स को उसकी सीमा तक ले जाने में सफल होंगे. इसके अलावा पायलट बिना किसी उपकरण के पैनल की चिंता किए बिना हवाई मुकाबला करने में कहीं ज्यादा सक्षम होंगे.

मिग कॉरपोरेशन के महानिदेशक इल्या तारासेंको ने एक प्रेस रिलीज में कहा, ‘मिग विमानों के ग्राहकों के लिए हमारी प्राथमिकता ऑटोमेशन में बढ़ोत्तरी, ऑपरेशन (संचालन) में आसानी और उड़ान सुरक्षा है. नई इंटेलिजेंट जी-लिमिट्स कंट्रोल सिस्टम हमारे आधुनिक विमान में लगाई जा रही है.’

MiG-29M / M2 और MiG-35 दोनों ही 9 जी-लिमिट में सक्षम हैं. बेहद ऊंचाई पर पायलट कभी-कभी ब्लैकआउट कर सकते हैं या धैर्य खो सकते हैं, जो एक युद्ध स्थिति में खतरनाक साबित हो सकता है.

मिग कॉर्पोरेशन, अपने सिस्टम में दावा करता है कि मिग का यह सिस्टम पायलटों को दुश्मन के खतरे और लड़ाकू मिशन पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाएगा, जबकि इंस्ट्रमेंट पैनल और फ्लाइट डेटा के बारे में बिना परेशान हुए यह उच्च गति बनाए रखेगा.यह नया सिस्टम एयरक्राफ्ट कंट्रोल स्टिक पर अतिरिक्त बल लगाने के साथ-साथ सिस्टम को अस्थायी या पूरी तरह से स्विच-ऑफ करने की भी अनुमति भी देता है.

जहां मिग -29 एम / एम 2 4 ++ पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं और रूसी वायु सेना के साथ सेवा में हैं. वहीं मिग-35 लड़ाकू विमानों की सीरीज में सबसे एडवांस और सबसे नया जेट है. मिग-29 M एक एकल-सीटर लड़ाकू विमान है और मिग-29 M2 एक दो सीटर लड़ाकू विमान है. मिग-35, एकल-सीट और डबल सीट वर्जन्स (मिग -35 डी) में भी आता है, लेकिन यह अभी भी डेवलपमेंट और टेस्टिंग फेज में हैं.

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