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बाधाओं का विशाल पर्वत

बाधाओं का विशाल पर्वत

बाधाओं का विशाल पर्वत

ये बाधाओं का विशाल पर्वत,

जो तुम्हारे समक्ष सिर उठाये खड़ा है,

इससे कभी मत घबराना कभी मत डरना

और ना ही अपनी नियति को कोसना

कि, क्यों इसने तुम्हारी राह में,

इस विशाल घमंडी पर्वत को खड़ा किया?

क्योंकि शायद तुम नहीं जानते,

लेकिन…

तुम्हारी नियति भलि भांति

ये जानती है कि, केवल तुम…

हाँ! केवल एक तुम ही हो….

जो इस घमंडी पर्वत का सिर झुका सकता है

हर किसी में ये हिम्मत, ये हौसला नहीं होता

तो चढ़ जाओ बिना सोचे, बिना डरे

इस विशाल पर्वत पर और तोड़ डालो

इसका घमंड, झुका दो इसे अपने कदमो तले

लहरा दो परचम अपने नाम का

इसकी सबसे ऊंची, उस चोटी पर….

जहां सफलता और शोहरत दोनों विराजमान हैं

क्योंकि…

नियति ये जानती है कि..

एक तुम

केवल तुम ही हो, जो ये कर सकता है।

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