Shri Ram hunt the Dragon

(Taiwan News) की वेबसाईट पर एक पोस्टर नजर आया है, जो कि सोशल मीडिया पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ताइवान न्यूज़ पर प्रकाशित इस पोस्टर में भगवान राम ड्रैगन को मारते हुए नजर आ रहे हैं। ज्ञात हो कि भगवान राम बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं।

अपनी विस्तार और वर्चस्ववादी नीतियों के लिए कुख्यात चीन को दुनिया ड्रैगन का भी नाम देती है। चीन अपनी ‘नाइन डैश पॉलिसी’ और कम्युनिस्ट विचारधारा के कारण अपने आसपास के तमाम क्षेत्र पर बलपूर्वक और कुटिलता से नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास सदियों से करता आया है। चीन की इसी नीति से इसका एक और पड़ोसी मुल्क भी परेशान है जिसका नाम है ताइवान!

इस पोस्टर में भारतीय सभ्यता, आस्था और संस्कृति के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले भगवान राम चीनी ड्रैगन को तीर से मारते हुए नजर आ रहे हैं। इस पोस्टर का शीर्षक है – ‘फोटो ऑफ़ द डे: भारत के राम चीन के ड्रैगन को ठिकाने लगाते हुए।’

हालाँकि, ताइवान न्यूज़ ने भी इस पोस्टर को किसी अन्य स्रोत से लेकर प्रकाशित किया है। ताइवान न्यूज़ के अनुसार, यह पोस्टर हांगकांग सोशल मीडिया साइट LIHKG पर पोस्ट किया गया था।

इस चित्र में भगवान राम एक धनुष से चीनी ड्रैगन को लक्ष्य बनाते हुए उसे मारते नजर आ रहे हैं। इसमें संदेश लिखा गया है, जिसमें भगवान राम ड्रैगन का संहार करने की मुद्रा में हैं और लिखा गया है – ‘हम जीतते हैं” और “हम मार डालते हैं।”

सोशल मीडिया पर यह पोस्टर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है

उल्लेखनीय है कि चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी इसके लिए सेना के इस्तेमाल पर भी जोर देती आई है। ताइवान के पास अपनी खुद की सेना भी है। जिसे अमेरिका का समर्थन भी प्राप्त है।

अंतरराष्ट्रीय सीमा को लेकर विवाद में चीन भारत ही नहीं बल्कि अन्य पड़ोसी देशों के साथ भी संघर्षरत है। इसका एक उदाहरण यह है कि जब चीन के सैनिक भारतीय सीमा में घुसकर भारतीय सैनिकों से झड़प कर रहे थे उसी समय ताइवान ने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक चीनी फाइटर प्लेन को करारा जवाब देते हुए वापस खदेड़ दिया था। ताइवान ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर चीनी विमानों ने तीन बार हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। चीन और ताइवान के बीच भी विवाद बढ़ने के आसार हैं।

चीन और ताइवान में गर्मागर्मी का कारण
वर्ष 1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने शियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद शियांग काई शेक ने ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्युनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है। लेकिन चीन इस द्वीप को अपना अभिन्न अंग मानता आया है।

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